निर्जला एकादशी व्रत आज

निर्जला एकादशी व्रत : जो कि सभी एकादशियों में बहुत खास माना जाता है। इस व्रत के बारे में महर्षि वेद व्यास ने भीम को बताया था। फिर भीम ने ये व्रत किया। तब से इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाने लगा।

सुबह जल्दी उठकर गंगाजल मिले पानी से नहाएं। पीपल और तुलसी में जल चढ़ाएं। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करें। महिलाएं मेहंदी लगाकर श्रृंगार करें। पूरे दिन व्रत रखें। फिर अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर सुबह जल्दी उठकर नहाएं। भगवान विष्णु की मूर्ति के पास या पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाकर प्रार्थना करें।

श्रद्धा के हिसाब से ब्राह्मणों को ठंडे पानी से भरा मिट्‌टी का घड़ा, खाना, कपड़े, छतरी, पंखा, पान, गाय, आसन, पलंग या सोने का दान दें। ऐसा करने से कई बार सोने का दान करने जितना पुण्य फल मिलता है। इस दिन किसी भी जरुरतमंद को खाली नहीं लौटाना चाहिए।

ये एकादशी इसलिए खास है क्योंकि इस दिन पानी नहीं पिया जाता है। ज्येष्ठ महीने में दिन बड़े और ज्यादा गर्मी वाले होते हैं, इसलिए प्यास लगती ही है। ऐसे में खुद पर काबू रखना और पानी नहीं पीना, तपस्या करने जैसा काम है। इसी कारण ये व्रत करने से सभी 14 एकादशी व्रत करने जितना पुण्य मिल जाता है।


महर्षि वेदव्यास ने भीम को बताया इस व्रत के बारे में
भीम ने महर्षि वेदव्यास से पूछा कि मेरे चारों भाई सहित माता कुंती और द्रौपदी हर एकादशी पर भोजन नहीं करते और उपवास रखते हैं। निर्जला एकादशी पर तो पानी भी नहीं पीते हैं। वो चाहते हैं कि मैं भी उनकी तरह विधि-विधान से उपवास रखकर अन्न और जल ग्रहण नहीं करूं, लेकिन मैं ऐसा नहीं कर पाता हूं। आप बताएं मुझे क्या करना चाहिए।